Wednesday, 23 February 2022

कट जाता है मांगलिक दोष, यदि कुंडली में ये ग्रह स्थिति हो तो / Mangal dosh cancellation

Posted by Dr.Nishant Pareek

 कट जाता है मांगलिक दोष, यदि कुंडली में ये ग्रह स्थिति हो तो...........


manglik dosh ki kaat kaise hoti hai ??

Mangal dosh cancellation 

जीवन में मांगलिक योग विभिन्न प्रकार से प्रभावित करता है। जैसे विवाह में विलम्ब, बाधा, धोखा, शादी के बाद पति-पत्नी दोनों या किसी एक को शारीरिक, व्यवसायिक या आर्थिक पीडा, आपसी मतभेद, आरोप-प्रत्यारोप, सम्बन्धविच्छेद आदि। यदि दोष में बल अधिक होता है तो दोनों में से किसी एक की मृत्य भी हो जाती है।

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परन्तु इससे भयभीत नहीं होना चाहिये। यह प्रयास करना चाहिये कि मांगलिक का विवाह मांगलिक से ही हो। क्योंकि समान रूप से मंगल दोष होने पर वह निष्फल हो जाता है। अर्थात् उसका प्रभाव समाप्त हो जाता है। तथा पति-पत्नी सुखी रहते हैं - 

(1) दम्पत्योर्जन्मकाले व्ययधनहिबुके सप्तमे लग्नरन् ।

   लग्नाच्चन्द्राच्च शुक्रादपि भवति यदा भूमिपुत्रो द्वयो।। 

   तत्साम्यात्पुत्रमित्रप्रचुरधनपतां दंपति दीर्घ-काला।

   जीवेतामेकहा न भवति मश्तिरिति प्राहुरत्रात्रिमुख्याः।।

 भावार्थ:- यदि लडका और लडकी की कुण्डली में मंगल पहले, दूसरे, बारहवें, चौथे, सातवें या आठवे घर में लग्न, चंद्रमा, शुक्र से समभाव में स्थित हो तो समान मंगलदोष होने के कारण वह प्रभावहीन हो जाता है। परस्पर सुख, धन धान्य, संतति, स्वास्थ्य, तथा मित्रादि प्राप्त होते हैं। 

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(2) कुजदोष वत्ती देया कुजदोषवते किल।

   नास्ति दोषो न चानिष्टंदम्पत्यो सुखवर्धनम।।

 भावार्थ:- मंगल दोष से पीडित कन्या का विवाह मंगल दोष वाले वर के साथ करने से दोष का फल नष्ट हो जाता है। तथा दोनों के मध्य प्रेम बढ़ता है। 

(3) भौम तुल्यो यदा भौमो पापो वा तादृशो भवेत।

   वर बध्वोर्मिथस्तत्र भौम दोषो न विद्यते।।

 भावार्थ- यदि कुण्डली में पहले, चौथे, सातवें, आठवें तथा बारहवें घर में से किसी भी स्थान पर लडका व लडकी की दोनों की कुण्डली में मंगल स्थित हो तो परस्पर दोषों का नाश होकर विवाह में शुभ फल प्राप्त होते है।


(4) “राशि मैत्रम् यदा याति-गणैक्य वा यदा भवेत।

   अथवा गुण बाहुल्ये भौम दोषो न विद्यते।। 

भावार्थ - यदि लडका-लडकी की कुण्डली में आपस में राशि मैत्री हो गण भी समान हो तथा 27 या इससे अधिक गुण मिलते हो तो मंगल दोष निष्फल हो जाता है। 

चैथे भाव में मांगलिक दोष का शुभ अशुभ सामान्य फल जानने के लिये क्लिक करे

(5) दोषकारी कुजो यस्य बलीचे दुक्त दोषकृत।

   दुर्बलः शुभ दृष्टोवा सूर्येणस्मऽगतोपिवा।।

 भावार्थ:- कुण्डली में मंगल अनिष्ट स्थानों में बलवान् होकर बैठा हो तभी वह हानि करेगा अर्थात् मंगल दोष बनायेगा। यदि वह दुर्बल होकर, या शुभग्रह से दृष्ट होकर या सूर्य के साथ अस्त हो तो फिर हानिकारक नहीं माना जायेगा। 

(6) वाचस्पतो नवम् पंचम केन्द्र संस्थे जाताऽगंना भवति पूर्ण विभूति युक्ता। 

    साध्वी सुपुत्र जननीरू सुखिनी गुणाड्डया सप्ताष्टक यदि भवेद शुभग्रहोऽपि।। 

भावार्थ:- यदि कन्या की कुण्डली में पहले, दूसरे, चौथे, सातवें, आठवें तथा बारहवें घर में मंगल हो और शुभ ग्रह बृहस्पति केन्द्र या त्रिकोण में हो तो मंगल दोष नहीं होता व कन्या साध्वी, सुपुत्र को जन्म देने वाली, सभी तरह से सुखी, गुणों से सम्पन्न, ऐश्वर्य युक्त, सौभाग्यशाली होती है।

(7) यदि किसी एक कुण्डली में मंगल दोष हो और दूसरे की कुण्डली में उसी घर में कोई पापग्रह हो (शनि, राहु) तो मांगलिक दोष समाप्त हो जाता है। इस स्थिति में विवाह कर सकते है।

(8) यदि किसी की कुण्डली में पहले घर में मेष का मंगल हो, चौथे घर में वृश्चिक का, सातवें घर में मकर का, आठवें घर में कर्क का तथा बारहवें घर में धनु राशि में हो तो मांगलिक दोष समाप्त हो जाता है।

(9) यदि कुण्डली में मंगल किसी मंगली घर में तो तथा साथ में गुरु बुध या चंद्रमा भी हो अथवा इनमें से किसी ग्रह से दृष्ट हो तो मंगल दोष समाप्त हो जाता है।


 (10) कुण्डली में मांगलिक दोष हो तथा मंगल निर्बल हो और पहले या सातवें घर में बली गुरु हो या शुक्र हो तो मंगल दोष समाप्त हो जाता है।

(11) यदि मंगल दोष वृश्चिक, मकर, सिंह, धनु, मीन राशि में हो तो हानिकारक नहीं होता।

(12) यदि गुरु मंगल को देखता हो, या गुरु के साथ मंगल हो या शक दूसरे घर में हो या बली चंद्र केन्द्र में हो तो मंगली दोष प्रभावी नहीं रहता है।

(13) मंगल यदि चर राशि में हो तो भी मंगली दोष समाप्त हो जाता है।

(14) यदि मंगल चौथे घर में वृष या तुला राशि में हो तो हानिकारक नहीं होता।

(15) यदि मंगल या शनि मंगली घर में वक्र हो तो मंगल दोष नहीं रहता।

(16) यदि मंगल, गुरु या शनि से राशि परिवर्तन करे तो भी मंगल दोष शान्त हो जाता है।

(17) यदि बारहवें घर का मंगल, मिथुन या कन्या राशि में हो तो मंगली दोष नहीं लगता।

(18) मांगलिक कुण्डली में यदि सप्तम घर का स्वामी व शुक्र बली हो या सप्तम में हो या सप्तम को देखते हो तो मंगल दोष समाप्त हो जाता है।

मांगलिक दोष की शांति के सरल उपाय जानने के लिये क्लिक करे।

(19) मांगलिक कुण्डली में यदि बली चन्द्रमा केन्द्र में हो तो भी मंगल दोष समाप्त हो जाता है।

(20) यदि मंगल केतु के नक्षत्र (अश्विनी, मघा, मूल) में हो तो भी मंगल दोष समाप्त हो जाता है।

मेष, वृष तथा मिथुन लग्न में मांगलिक दोष की शांति के सरल उपाय जानने के लिये क्लिक करे।

कर्क, सिंह तथा कन्या लग्न में मांगलिक दोष की शांति के सरल उपाय जानने के लिये क्लिक करे। 

तुला, वृश्चिक तथा धनु लग्न में मांगलिक दोष की शांति के सरल उपाय जानने के लिये क्लिक करे। 

मकर, कुंभ तथा मीन लग्न में मांगलिक दोष की शांति के सरल उपाय जानने के लिये क्लिक करे। 

डॉ. बी. वी. रमन के अनुसार यदि किसी कुण्डली में मंगल दूसरे घर में बुध की राशि में हो तो मांगलिक योग समाप्त हो जाता है। यदि बारहवें घर में मंगल, शुक्र की राशि में हो तो भी मंगल हानि नहीं करता है। यदि चौथे घर में मंगल स्वराशि का हो तो भी हानि नहीं करता है। यदि सातवें घर में मकर का मंगल हो या कर्क का मंगल हो तो भी मंगल दोष समाप्त हो जाता है। मंगल यदि आठवें घर में गुरु की राशि (धनु या मीन) में हो तो भी मंगली दोष समाप्त हो जाता है।


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Sunday, 9 January 2022

kalsarp yog or vivah jivan / कालसर्प योग और विवाह जीवन

Posted by Dr.Nishant Pareek

 kalsarp yog or vivah jivan


कालसर्प योग और विवाह जीवन

कालसर्प योग का नाम सुनते ही प्रत्येक व्यक्ति के मन में एक अजीब तरह का डर पैदा हो जाता है। उस योग के नाम से वह तरह तरह की बातें सोचने लगता है। नई नई कहानियां बनाने लगता है। अनेक तरह की घटनाओं को खुद से जोडने लगता है। उसे ऐसा लगता है कि अब दुनिया की सारी बुरी घटनाऐं उसके साथ ही घटित होने वाली है। उसकी रात की नींद और दिन का चैन गायब हो जाता है। और वह इसी उधेडबुन में रहता है कि इस योग से कैसे बचा जाये। या इस योग का निवारण कैसे किया जाये। जिससे कि जीवन में सुख शांति बनी रहे। और परिवार भी सुरक्षित रहे। जिसकी कुंडली में कालसर्प दोष होता है, तो वह किसी न किसी तरह से उस व्यक्ति को पीडित अवश्य करता है। जिन भावों से संबंधित कालसर्प योग होता है, उसी भाव से संबंधित फलों से जुडी समस्याएं व्यक्ति को प्रदान करता है। उससे संबंधित सुखों में कमी करता है। 

कालसर्प योग देता है संतानहीनता, यदि इन भावों में हो तो, कहीं आप भी तो नहीं है इसके शिकार, जानिए इस लेख में।

इसी तरह जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प योग बनता है उनसे सम्बन्धित व्यक्तियों का दाम्पत्य जीवन नरक के समान हो जाता है। मेरे विचार से सुखद दाम्पत्य जीवन का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण अंग है किसी व्यक्ति को जीवन में सबकुछ प्राप्त हो। यदि दाम्पत्य सुख से वंचित हो, प्रतिदिन कलह होती हो, विचारों में असहनीय मतभेद हो, एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप के कारण वैवाहिक जीवन में सदैव झगडे होते रहे तो किसी पल एक-दूसरे से कुछ समय के लिए पृथक रहकर शान्तिपूर्ण जीवन जीने की इच्छा प्रबल हो जाती है। 

कालसर्प योग से कैसी परेशानी आती है ? जानिए इस लेख में,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

दाम्पत्य जीवन में कभी धन के कारण, कभी संतान के कारण, कभी आचरण के कारण मतभेद उत्पन्न हो, तो श्रेष्ठ पद तथा सामाजिक सम्मान और प्रतिष्ठा के बाद भी जीवन निराशा और उदासी के घोर अंधकार में डूब जाता है, इसलिये जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प योग उपस्थित हो, उन कुंडलियों में विवाह हेतु मिलान करते समय इस विषय पर भी गभीरता से विचार करना चाहिए। कुंडलियों में यह परीक्षण करना चाहिए कि एक कुंडली के दोष का संतुलन दूसरी कुंडली के साथ हो रहा है या नहीं। 

उल्लेखनीय है कि दाम्पत्य जीवन के आक्रान्त होने के लिए सप्तम भाव तथा द्वितीय भाव से सम्बन्धित ग्रह तथा उनके स्वामी और वहाँ पर स्थित ग्रहों की भूमिका पर भी गंभीरता के साथ विचार आवश्यक है। यदि किसी कुंडली में कालसर्प योग विद्यमान है तो उपरोक्त सभी स्थितियां उसके जीवन को पीडित नहीं करेंगी। इनमें से कोई एक या दो स्थितियाँ उस व्यक्ति को व्यथित करने के लिए पर्याप्त हैं। किस प्रकार का कालसर्प योग कुंडली में विद्यमान है, व्यक्ति की परेशानी का प्रकार इस पर निर्भर करता है। कालसर्प योग अनेक प्रकार के होते हैं जिनका विस्तृत विवेचन अग्रिम लेखों में करेंगें। 

संक्षिप्ततः यह ज्ञान आवश्यक है कि यदि समस्त ग्रह राहु और केतु की धुरी के मध्य स्थित हों, तो कुंडली के जिन भावों को वह प्रभावित करते हों तथा उन भावों के स्वामी भी यदि आक्रान्त हों, तो कालसर्प योग का विष जीवन को सुगम नहीं रहने देता। अनेक प्रकार से आक्रान्त कर देता है। योग्यता, प्रतिभा, परिश्रम तथा सम्यक् प्रयास के पश्चात भी अपेक्षित सफलता नहीं प्राप्त होती है।


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Saturday, 27 November 2021

Guru ka kumbh rashi me gochar aapki rashi par kaisa fal dega ? / गुरु का कुम्भ राशि में गोचर आपकी राशि कैसा फल देगा ? जानिए इस लेख में

Posted by Dr.Nishant Pareek

Guru ka kumbh rashi me gochar aapki rashi par kaisa fal dega ? /


 गुरु का कुम्भ राशि में गोचर आपकी राशि  कैसा फल देगा ? जानिए  इस लेख में 


देवताओं के गुरू और नभ मंडल का सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति मकर राशि से भ्रमण करके कुंभ राशि में गोचर करने जा रहे है। गुरु ग्रह भाग्य, धर्म और सम्मान प्राप्ति के मुख्य कारक माने जाते हैं।  बृहस्पति का नवग्रहों में प्रमुख स्थान है। गुरु एक राशि में लगभग 13 माह तक गोचर करते हैं व लगभग बारह वर्षों में बारह राशियों का भ्रमण पूर्ण करते हैं। 2009 में गुरु कुंभ राशि में आए थे और 20 जून से 17 अक्तूबर 2021 तक गुरु वक्री रहे। फिर 18.10.21 को गुरु मकर राशि मे मार्गी हुए। इस  वक्री, मार्गी व अस्तगत स्थितियों में गुरु का फल कुछ व्यक्तियों पर शुभ तो कुछ पर अशुभ होता है। 

20 नवंबर को रात्रि 11 बजकर 19 मिनट पर रोहिणी नक्षत्र व वृषभ राशि में गुरु अपनी नीच राशि मकर से निकलकर शनि की ही कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे। कुंभ राशि प्रवेश के साथ ही शनि गुरु का युति संबंध भंग होगा। इस युति के विच्छेद होने से कोरोने के अप्रत्याक्षित रूप से बढने की प्रबल संभावना है। गुरू का यह गोचर सभी राशियों को किस प्रकार के फल प्रदान करेगा ? यह देखने से पहले गुरू का सामान्य परिचय देखते हैः-

गुरू ग्रह का सामान्य परिचयः-

गुरु (बृहस्पति) ज्योतिष के नव ग्रहों में सबसे अधिक शुभ ग्रह माने जाते हैं। गुरू प्रमुख रूप से आध्यात्मिकता और धार्मिकता को विकसित करने का कारक हैं। तीर्थ स्थानों तथा मंदिरों, पवित्र नदियों तथा धार्मिक क्रिया कलाप से जुडे हैं। गुरु ग्रह को अध्यापकों, ज्योतिषियों, दार्शनिकों, लेखकों जैसे कई प्रकार के क्षेत्रों में कार्य करने का कारक माना जाता है। गुरु की अन्य कारक वस्तुओं में पुत्र संतान, जीवन साथी, धन-सम्पति, शैक्षिक गुरु, बुद्धिमता, शिक्षा, ज्योतिष तर्क, शिल्पज्ञान, अच्छे गुण, श्रद्धा, त्याग, समृ्द्धि, धर्म, विश्वास, धार्मिक कार्याे, राजसिक सम्मान देखा जा सकता है.

गुरु ग्रह से जुडे अन्य क्षेत्रः-

गुरू जीवन के अधिकतर क्षेत्रों में सकारात्मक उर्जा प्रदान करने में सहायक हैं। अपने सकारात्मक रुख के कारण व्यक्ति कठिन से कठिन समय को आसानी से सुलझाने के प्रयास में लगा रहता है। गुरू आशावादी बनाते हैं और निराशा को जीवन में प्रवेश नहीं करने देते हैं। गुरू के अच्छे प्रभाव स्वरुप जातक परिवार को साथ में लेकर चलने की चाह रखने वाला होता है। गुरु के प्रभाव से व्यक्ति को बैंक, आयकर, खंजाची, राजस्व, मंदिर, धर्मार्थ संस्थाएं, कानूनी क्षेत्र, जज, न्यायाल्य, वकील, सम्पादक, प्राचार्य, शिक्षाविद, शेयर बाजार, पूंजीपति, दार्शनिक, ज्योतिषी, वेदों और शास्त्रों का ज्ञाता होता है।

गुरु के मित्र ग्रह सूर्य, चन्द्र, मंगल हैं. गुरु के शत्रु ग्रह बुध, शुक्र हैं, गुरु के साथ शनि सम संबन्ध रखता है. गुरु को मीन व धनु राशि का स्वामित्व प्राप्त है. गुरु की मूलत्रिकोण राशि धनु है. इस राशि में गुरु 0 अंश से 10 अंश के मध्य अपने मूलत्रिकोण अंशों पर होते है. गुरु कर्क राशि में 5 अंश पर होने पर अपनी उच्च राशि अंशों पर होते हैं. गुरु मकर राशि में 5 अंशों पर नीच राशिस्थ होते हैं, गुरु को पुरुष प्रधान ग्रह कहा गया है यह उत्तर-पूर्व दिशा के कारक ग्रह हैं.गुरु के सभी शुभ फल प्राप्त करने के लिए पुखराज रत्न धारण किया जाता है. गुरु का शुभ रंग पिताम्बरी पीला है.  गुरु के शुभ अंक 3, 12, 21 है.  गुरु के अधिदेवता इन्द्र, शिव, ब्रह्मा, भगवान नारायण है.

गुरु की दान की वस्तुएं:-

गुरु की शुभता प्राप्त करने के लिए निम्न वस्तुओं का दान करना चाहिए.  स्वर्ण, पुखराज, चना दान, नमक, हल्दी, पीले चावल, पीले फूल या पीले लडडू. इन वस्तुओं का दान गुरूवार को करना शुभ रहता है.

गुरु का जातक पर प्रभाव:-

गुरु लग्न भाव में बली होकर स्थित हों, या फिर गुरु की धनु या मीन राशि लग्न भाव में हो, अथवा गुरु की राशियों में से कोई राशि व्यक्ति की जन्म राशि हो, तो व्यक्ति के रुप-रंग पर गुरु का प्रभाव रहता है. गुरु बुद्धि को बुद्धिमान, ज्ञान, खुशियां और सभी चीजों की पूर्णता देता है. गुरू का प्रबल प्रभाव जातक को मीठा खाने वाला तथा विभिन्न प्रकार के पकवानों तथा व्यंजनों का शौकीन बनाता है. गुरू चर्बी का प्रभाव उत्पन्न करता है इस कारण गुरू से प्रभावित व्यक्ति मोटा हो सकता है इसके साथ ही व्यक्ति साफ रंग-रुप, कफ प्रकृति, सुगठित शरीर का होता है.


गुरु कुण्डली में कमजोर हो, या पाप ग्रहों के प्रभाव में हो नीच का हो षडबल हीन हो तो व्यक्ति को गाल-ब्लेडर, खून की कमी, शरीर में दर्द, दिमागी रुप से विचलित, पेट में गडबड, बवासीर, वायु विकार, कान, फेफडों या नाभी संबन्धित रोग, दिमाग घूमना, बुखार, बदहजमी, हर्निया, मस्तिष्क, मोतियाबिन्द, बिषाक्त, अण्डाश्य का बढना, बेहोशी जैसे दिक्कतें परेशान कर सकती हैं. बृहस्पति के बलहीन होने पर जातक को अनेक बिमारियां जैसे मधुमेह, पित्ताशय से संबधित बिमारियों प्रभावित कर सकती हैं. कुंडली में गुरू के नीच वक्री या बलहीन होने पर व्यक्ति के शरीर की चर्बी भी बढने लगती है जिसके कारण वह बहुत मोटा भी हो सकता है. बृहस्पति पर अशुभ राहु का प्रबल व्यक्ति को आध्यात्मिकता तथा धार्मिक कार्यों दूर ले जाता है व्यक्ति धर्म तथा आध्यात्मिकता के नाम पर लोगों को धोखा देने वाला हो सकता है.

गुरू का यह गोचर सभी राशियों को किस प्रकार के फल प्रदान करेगा ? 

मेष

 बृहस्पति ग्रह चन्द्रमा से आपके ग्यारहवें भाव में होते हुए गोचर करेगा। यह सुखमय समय का प्रतीक है । इस समय कार्यालय में पदोन्नति, व्यापार में लाभ होने की प्रबल संभावना है। यहाँ तक कि व्यावसायिक क्षेत्र में और उच्च अधिकारी का पद प्राप्त हो सकता है । सामाजिक दृष्टि से भी यह अच्व्छा समय है क्योंकि आपकी समाज में प्रतिष्ठा बढ़ सकती है । इस समय आपकी शान-शौकत व आपकी सशरीर उपस्थिति पर सबका ध्यान जाएगा। आप अपने प्रियजन व मित्रों से कोई लाभ मिलने की आशा कर सकते हैं । इस दौरान आप देखेंगे कि आपके शत्रु नरम पड़ गए हैं व पराजित हो गए हैं।  धार्मिक कृत्यों में आपकी रुचि बढ़ेगी व मंत्रोच्चार की शक्ति आपके लिए लाभकारी सिद्ध हो सकती है।  यदि आप विवाह योग्य हैं तो विवाह के विषय में सोच सकते हैं और विवाहित दम्पत्ति परिवार में नए सदस्य के आने की आशा कर सकते हैं। आपमें से कुछ इस समय प्रेम - प्रसंग में लिप्त हो सकते हैं।  धन की बहुतायत रहेगी और आपमें से अधिकांश लोग भूमि, जायदाद, आभूषण नया वाहन व ऐशोआराम के नए साधन लेने के विषय में इस समय सोच सकते हैं । आप अच्छे स्वास्थ्य व मानसिक शान्ति का भरपूर आनन्द उठाएँगे । 

वृष

 बृहस्पति ग्रह चन्द्रमा से आपके दसवें भाव में होते हुए गोचर करेगा। यह जीवन की गति में व्यवधान लाएगा । इस समय आपकी सोच नकारात्मक हो सकती है व स्वयं को भाग्यहीन महसूस कर सकते हैं। इच्छाएँ पूर्ण न होने के कारण आपके स्वभाव में चिड़चिड़ापन भी आ सकता है। इधर - उधर भटकने से बचें क्योंकि इस विशेष समय में निराशा हाथ लगने की ही संभावना है ।  यही समय है जब आप विशेष चैतन्य रहें कि आप कार्यालय में वरिष्ठ पदाधिकारी व घर पर बड़ों से विवाद में न पड़ें । यदि आप सावधान नहीं रहे तो संभव है आपका पद व प्रतिष्ठा न रहे और आपका किसी सुदूर स्थान पर स्थानान्तरण हो जाये ।  स्वयं आपके व आपके बच्चों के स्वास्थ्य की ओर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है । अपने नेत्र व गले के प्रति सावधानी बरतें । शरीर को थकान से बचाने के लिए यही समय है जब आपको स्वस्थ रहन-सहन की शैली अपनानी होगी । इस समय विशेष सावधानी बरतें कि कहीं आपकी लापरवाही से बच्चों का जीवन खतरे में न पड़ जाए । 

मिथुन

 बृहस्पति चन्द्रमा से आपके नवें भाव में होते हुए गोचर करेगा । यह धन व वित्तीय लाभ का सूचक है । आप व्यापार व व्यवसाय में लाभ, कार्यालय में अधिकारपूर्ण पद, उद्यम में सफलता व अपने वरिष्ठ अधिकारियों से अनुग्रह की आशा कर सकते हैं । यह लेखकों, प्रकाशकों, व्याख्याताओं व पुस्तकों के क्षेत्र से सम्बन्धित सभी के लिए अच्छा समय सिद्ध हो सकता है ।  सामाजिक दृष्टि से भी यह अच्छा समय है । आपको सम्मान मिलने की संभावना है, आपकी प्रतिष्ठा बढ़ती चली जाएगी । धार्मिक कृत्यों में सर्वाेपरि रुचि होगी और आप इतने धार्मिक कार्यों में भाग लेंगे जितना संभव हो सकता है । आपको संतों का संग भी मिलेगा और आप सत्कार्यों पर धन व्यय करने को तत्पर रहेंगे ।  धन व आर्थिक लाभ मानों हर ओर से, हर संभव स्त्रोत से प्रवाहित होकर आता रहेगा । आप कृषि भूमि या चल अचल सम्पत्ति क्रय करने के विषय में सोच सकते हैं । अविवाहित अपनी इच्छा के अनुरुप पात्र से विवाह के विषय में सोच सकते हैं और संतान की इच्छा रखने वालों के लिए भी यह उचित समय है । आपमें से अधिकांश बहुत बढ़िया भोजन व शारीरिक ऐशोआराम का आनन्द लेंगे ।  स्वास्थ्य अच्छा रहेगा और आप सुदूर यात्रा पर जाने का मानस बना सकते हैं । 

कर्क

 बृहस्पति चन्द्रमा से आपके आठवें भाव में होते हुए गोचर करेगा । यह समय अधिकतर निराशाएँ लेकर आया है । स्वास्थ्य की ओर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पड़ेगी क्योंकि इन दिनों आप कुछ ऐसे रोगों से ग्रसित हो सकते हैं जिनमें जीवन को खतरा हो । साथ ही आप थकान व उत्साहहीनता भी महसूस कर सकते हैं ।  सफलतापूर्वक काम सम्पन्न करने में अत्यधिक परिश्रम की आवश्यकता पड़ सकती है । एकाग्रचित्त होकर काम करें । व्यर्थ विवादों में न पड़ें । अपने पद व प्रतिष्ठा को बिल्कुल ढ़ील न दें क्योंकि इस समय अपमानजनक रुप से यह हाथ से फिसल सकते हैं । आपको राजकीय आक्रोश का सामना, मुकदमेबाजी में लिप्त होना यहाँ तक कि कारागार जाने जैसी स्थितियों तक का सामना करना पड़ सकता है ।  वित्तीय मामलों पर विशेष नजर रखें, चोरों व व्यर्थ के खर्चों से सावधान रहें ।  यदि आप यात्रा की योजना बना रहे हैं तो उसे फिलहाल टाल दें । यात्रा कष्टदायक हो सकती है और संभव है कि वांछित परिणाम प्राप्त न हों ।  परिवारजन व मित्रों से विवाद से दूर रहें क्योंकि इससे शत्रुता पनप सकती है । इन दिनों आपका व्यवहार चिड़चिड़ा, दयाहीन व बिना सोच-समझा हो सकता है । स्वभाव को शान्त रखें ।  

सिंह

बृहस्पति चन्द्रमा से आपके सातवें भाव में होते हुए गोचर करेगा । यह जीवन में सुखद समय लाएगा । आप इन दिनों शारीरिक व भौतिक सुखों का आनन्द ले सकते हैं जैसे उत्तम सुस्वादु भोजन, जायदाद पाना, फालतू समय में आमोद-प्रमोद या किसी अधिकारी द्वारा विशेष सम्मान दिया जाना । सामाजिक जीवन में भी आप अच्छे समय की आशा कर सकते हैं । आप ऐसे विशिष्ट व्यक्तियों से मिल सकते हैं या मित्रता कर सकते हैं जो आपके लिए लाभप्रद सिद्ध हों । व्यक्तिगत रुप में भी आप एक चुस्त-दुरुस्त वक्ता व उत्कृष्ट बुद्धिमता के द्वारा पहचान बना सकते हैं । इस समय आप घर से बाहर रहकर कोई मांगलिक कार्य सम्पन्न कर सकते हैं ।  स्वास्थ्य अच्छा रहेगा । आपकी सचरित्रता व शारीरिक भव्यता की ओर सबका ध्यान जाएगा ।  इस समय आरामदायक घर प्राप्त करने का है एवम् इच्छापूर्त्ति होने की संभावना है । एकल व्यक्ति विवाह के विषय में व विवाहित परिवार बढ़ाने के बारे में सोच सकते हैं । यदि आप विवाहित हैं तो दाम्पत्य जीवन का परमानन्द प्राप्त होने की संभावना है । 

 कन्या

 बृहस्पति चन्द्रमा से आपके छठे भाव में होते हुए गोचर करेगा। यह जीवन के अधिकांश पहलुओं में परेशानियों का सूचक है । अपने परिवार व मित्रों के साथ व्यर्थ के विवाद में पड़कर आप अपने शत्रुओं की संख्या बढ़ाएँगे । आप अपने परामर्शदाताओं से भी शत्रुता कर सकते हैं । शत्रुओं से विशेष सावधान रहें क्योंकि वे आपके लिए सदा से भी अधिक परेशानियाँ खड़ी कर सकते हैं ।  स्वास्थ्य के प्रति ध्याद देना आवश्यक है । संभव है कि सब कुछ उत्तम हो फिर भी आप बेचौनी व दुरूख का अनुभव करें । स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही न बरतें व रोग से बचाव रखें ।  हो सकता है कि आप कुछ धन व जायदाद गँवा बैठें । अत इस दौरान अपने कार्यक्षेत्र में अधिक सतर्क रहें । चोरी, कार्यालय में आग व राजकीय रोष से सावधान रहें । यदि सेवारत हैं तो मालिक व सहयोगियों से अच्छा तालमेल बनाए रखें जिससे आपको उनकी नाराजगी या उपेक्षा न झेलनी पड़े । कोई नया कार्य प्रारम्भ करने जा रहे हों तो स्थगित कर दें क्योंकि यह समय कुछ नया करने के लिए उपयुक्त नहीं होगा । अपने जीवन साथी के साथ अपने सम्बन्ध सावधानीपूर्वक व बुद्धिमानीपूर्वक निभाने की आवश्यकता पड़ सकती है । अपने साथी से विवाद से बचें व हर प्रकार की किसी से भी मुकदमेबाजी से दूर ही रहें । 

तुला

बृहस्पति चन्द्रमा से आपके पाँचवें भाव में होते हुए गोचर करेगा । यह सुख व प्रयासों में सफलता का सूचक है । आप समस्त योजनाओं के सफलतापूर्वक सम्पन्न होने की आशा रख सकते हैं व कार्य तथा व्यवसाय के प्रत समर्पण के भाव में वृद्धि होगी । आपके प्रयत्नों से आपको उच्चस्तरीय पुरस्कार मिलेंगे व व्यवसाय तथा व्यापार में लाभ के और भी अच्छे अवसर मिलने की संभावना है । यदि आप विद्यार्थी हैं अथवा ज्ञानोपार्जन कर रहे हैं तो इस क्षेत्र में भी आप सफलता की आशा कर सकते हैं ।  वित्तीय दृष्टि से भी आप व आपके परिवार के लिए यह अच्छा समय सिद्ध हो सकता है । आप पशुधन, घर, आभूषण व वस्त्र खरीदने की सोच सकते हैं ।  व्यक्तिगत रुप से, यदि आप अविवाहित हैं तो आपको इस समय आदर्श साथी मिल सकता है और आप विवाह के बारे में सोच सकते हैं । यदि विवाहित हैं तो परिवार में नए सदस्य के आगोचर की आशा कर सकते हैं । परिवार के दूसरे सदस्यों से सम्बन्ध सुधरेंगे और आप उनसे लाभान्वित हो सकते है । आप घरेलू काम में सहायता के लिए किसी सेवक को रख सकते हैं । घर में कोई मांगलिक कार्य सम्पन्न हो सकता है जिसमें आपका योगदान सर्वाधिक होगा ।  सामाजिक दृष्टि से अच्छा समय है । उच्च वर्ग का साथ एवम् राजकीय अनुग्रह की आशा की जा सकती है । बुद्धि की प्रखरता चरम सीमा पर होने से आप हर प्रकार के तार्किक वाद-विवाद से सफलतापूर्वक उबरेंगे । फालतू समय आमोद-प्रमोद में व्यतीत होगा, सामाजिक स्तर ऊँचा उठ सकता है । मानसिक रुप से आप शान्ति अनुभव करेंगे । 

वृश्चिक

 बृहस्पति चन्द्रमा से आपके चतुर्थ भाव में होते हुए गोचर करेगा । ये आपके लिए चिन्ताएँ लेकर आयाहै । कार्यक्षेत्र में ये अनेक कठिनाइयाँ उत्पन्न करेगा व आपकी पदोन्नति में भी विलम्ब हो सकता है । जायदाद सम्बन्धी मामलों व मुकदमेबाजी से दूर रहें ।  शत्रुओं से बचें व विशेष ध्यान रखें कि नए शत्रु न बनें । अपने सम्बन्धियों व मित्रों से मधुर सम्बन्ध रखें । इन दिनों आप किसी ऐसे परिवार में जाएँगे जहाँ किसी की मृत्यु हुई हो ।  आर्थिक रुप से भी यह कठिन समय है । व्यर्थ के खर्चों व यात्रा से बचें ।  अपनी व अपनी माता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें । आप इस समय कमजोरी व जीवन में एक फीकापन महसूस कर सकते हैं । पालतू पशुओं व कार यात्रा से बचें क्योंकि दुर्घटना की संभावना है ।  समाज में अपना स्तर ऊँचा बनाए रखें व समाज के सदस्यों से मधुर सम्बन्ध बनाएँ रखें क्योंकि विरोध का सामना करना पड़ सकता है । आपको इस काल में गहरी मानसिक चिन्ता हो सकती है व अपमान झेलना पड़ सकता है । 

धनु

बृहस्पति चन्द्रमा से आपके तृतीय भाव में होते हुए गोचर करेगा । यह आपके जीवन में बाधाएँ व अस्वस्थता लेकर आएगा । वित्त हेतु भी यह समय अच्छा नहीं है क्योंकि व्यापार में किए गए प्रयासों में असफलता व अड़चनें आ सकती हैं । हाथ से धन भी जा सकता है ।  काम में आपको अपना पद व स्थान बनाए रखने हेतु सतर्क रहना पड़ सकता है । आपको अपने मालिक व सहकर्मियों का इस दौरान विरोध भी झेलना पड़ सकता है ।  अपने मित्रों व भाई-बहनों से विवाद में न पड़ें क्योंकि इससे झगड़ा हो सकता हैं । इस समय किसी रिश्तेदार व मित्र की मृत्यु भी हो सकती है ।  आप एवम् आपके जीवनसंगी के बीमान होने का खतरा है । अतरू स्वास्थ्य के प्रति अतिरिक्त सतर्कता बरतें । आप मानसिक चिन्ताओं व अन्य कठिनाइयों से गुजर सकते हैं ।  यात्रा से बचें क्योंकि यह हानिकारक हो सकता है ।  दूसरी और आपमें से कुछ कोई पवित्र अनुष्ठान कर सकते हैं व विवाह के बारे में सोच सकते हैं ।

मकर

बृहस्पति चन्द्रमा से आपके द्वितीय भाव में होते हुए गोचर करेगा । यह कुल मिलाकर शुभ समय का सूचक है । यह दौर आपकी वर्तमान आयु, कृषि, व्यापार में लाभ प्राप्ति व प्रसन्नतापूर्वक दान कार्यों में व्यय किए जाने वाले धन आदि की वृद्धि में वरदानस्वरुप सिद्ध हो सकता है । इसमें भूमि, जायदाद या सम्पदा में आप निवेश कर सकते हैं व यदि कोई ऋण है तो उसे चुकाने में यह समय सहायक होगा ।  घर के लिए भी यह सुखमय दौर है व परिवार के लिए आनन्द लेकर आया है । दाम्पत्य जीवन में आप सुख की आशा कर सकते हैं । परिवार में नए सदस्य का आगोचर हो सकता है ।  कामकाज में आप अधिकारियों का विश्वास प्राप्त करेंगे व दूसरे आपसे प्रभावित होंगे ।  इस समय आप शत्रुओं पर विजय प्राप्त करेंगे । सामाजिक रुप से यह समय तुष्टिकारक है क्योंकि आपको और अधिक आदर मिलने की संभावना है व आपको उच्च कोटि की शान-शौकत व मान का अनुभव होने वाला है ।  मानसिक रुप से आप शान्ति अनुभव करेंगे तथा अपनी बुद्धि को इस समय और भी प्रखर करने की संभावना है । 

कुम्भ 

बृहस्पति चन्द्रमा से आपके प्रथम भाव में होते हुए गोचर करेगा । यह आपके जीवन में कुछ महत्तवपूर्ण नकारात्मक परिणामों का सूचक है । किसी भी प्रकार के रोग से बचने को स्वास्थ्य की ओर विशेष ध्यान देने व सावधानी बरतने की आवश्यकता है । स्वास्थ्य का प्रश्न हो तो जीवन को खतरे में न डालें ।  वित्त की दृष्टि से भी समय कठिन है और कुछ अनावश्यक खर्चों के कारण धन हाथ से जा सकता है ।  लम्बी यात्रा से बचें क्योंकि वांछित परिणाम मिलने की संभावना नहीं है व कष्ट झेलना पड़ सकता है । आपके मातृभूमि से दूर रहने की भी संभावना है ।  यदि आप बेरोजगार हैं तो निराशा ही हाथ लग सकती है । व्यवसाय में भी कठिन समय से गुजरना पड़ सकता है । वरिष्ठ व्यक्तियों से विवाद से बचें क्योंकि यह मानसिक कष्ट का कारण बन सकता है । अपनी परियोजना समय पर सफलतापूर्वक पूरी करने हेतु अतिरिक्त श्रम करें ।  इस समय आपको सरकार का आक्रोश, अपमान व अवनति भी झेलनी पड़ सकती है । अपने पद व प्रतिष्ठा को बनाए रखें व किसी भी मूल्य पर उन्हें खतरे में न डालें ।  साथ ही परिवार में भी विवाद से बचें व शान्त रहें । अन्य व्यक्तियों से व्यवहार करते समय अपने निर्णयों का ध्यान रखें । यह समय मानसिक यातना व अवसाद ला सकता है अत अपना उत्साह व जोश बनाए रखें ।  फिर भी, आपमें से कुछ को इस विशेष समय में पुरानी समस्याओं का हल मिलेगा । आपको बालक के गर्भाधान का समाचार भी मिल सकता है । धार्मिक कृत्यों में रुचि बढ़ेगी ।  विद्यार्थियों को उत्तम सफलता मिलने की संभावना है । आपका सामाजिक सम्मान भी इस दौरान बढ़ सकता है । 

 मीन

     बृहस्पति चन्द्रमा से आपके बारहवें भाव में होते हुए गोचर करेगा । यह आपके लिए व्यय का सूचक है । उतना पैसा आने की आशा नहीं होगी जितना जाएगा । इस सबके अतिरिक्त व्यापार व व्यवसाय में भी कठिनाई सामने आ सकती है विशेष रुप से यदि वह पशुधन से सम्बन्धित हो ।  इसके अतिरिक्त आपको कुछ धन मांगलिक कार्यों व लम्बी यात्रा पर भी व्यय करना पड़ सकता है। यह समय आपको अपनी जन्मस्थली व संतान से दूर रहने को विवश कर सकता है ।  यदि आप नौकरीपेशा हैं तो अपना पद व स्थान बचाए रखें क्योंकि वह भी खतरे में हैं ।  आपको शारीरिक व मानसिक कष्ट झेलने पड़ सकते हैं और आप मनस्ताप, पश्चाताप व भय से ग्रसित हो सकते हैं । ऐसा कोई कार्य न करें जिससे जीवन जोखिम में पड़ जाय ।  इस दौरान आपके भटक जाने व ऐसा व्यवहार करने का खतरा हो सकता है जो आपके लिए सामान्य नहीं है । आपके चरित्र की गुणवत्ता अस्थाई रुप से गायब हो सकती है और अपने निकटवर्त्ती व प्रियजनों के प्रति आपका रवैया नकारात्मक हो सकता है ।  समाज आपके विपरीत जा सकता है और समाज में आपका अपमान व बदनामी हो सकती है । ध्यान रखिए कि आप किसी अप्रिय स्थिति में न फँस जाय । फिर भी आप में से कुछ की अतिरिक्त आय हो सकती है जिससे आप मनपसन्द वाहन खरीद सकते हैं । 


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Wednesday, 29 September 2021

Kundli ke in bhavon me bana kalsarp yog deta hai santanhinta, kahi aap bhi to nahi hai iske shikar ?/ कुंडली के इन भावों में बना कालसर्प योग देता है संतानहीनता। कहीं आप भी तो नहीं है इसके शिकार ? जानिए इस लेख में

Posted by Dr.Nishant Pareek

 Kundli ke in bhavon me bana kalsarp yog deta hai santanhinta, kahi aap bhi to nahi hai iske shikar ?



 कुंडली के इन भावों में बना कालसर्प योग देता है संतानहीनता। कहीं आप भी तो नहीं है इसके शिकार ? जानिए इस लेख में,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

काल और सर्प शब्द के मिलने से जो योग बनता है, वह कालसर्प योग कहलाता है। जो कि किसी की भी कुंडली में सर्वाधिक चर्चित बिन्दुओं में से एक है। स्वाभाविक है कि ज्योतिषशास्त्र के आरंभ से वर्तमान समय तक कालसर्पयोग विभिन्न रूपों में व्यक्ति के मन को उद्विग्न करता आ रहा है। इस परिदृश्य में सत्य और असत्य, पाखण्ड आदि भी सम्मिलित हो ही जाते है। क्योंकि इससे फिर कुछ फर्जी ज्योतिषी फायदा भी उठाने लग जाते है। और लूटने लग जाते है। जिसके कारण वास्तविक ज्योतिषी भी बदनाम होते है और जो लोग वास्तव में कालसर्प योग से परेशान है, वो भी इसका उपाय कराने से पीछे हटने लग जाते है और जीवनभर परेशान भी रहते है। परंतु वह उपाय नहीं कराते है। क्योंकि उनको अपने साथ धोखा होने का डर रहता है। और विधि विधान में कुछ गलत होने पर अशुभ होने का डर होता हैै, वो अलग। इसलिये लोग इस योग के अशुभ फल को जीवनभर झेलते ही रहते है। 

राहु केतु को छायाग्रह माना गया है। जो कि कालसर्पयोग के दो ध्रुव हैं। इसलिये सबसे पहले  इनका प्रारंभिक ज्ञान आवश्यक है। जब समस्त ग्रह राहु और केतु की धुरी के एक ओर हों तथा शेष भाग ग्रह से रिक्त हो तो कालसर्पयोग का निर्माण होता है। राहु और केतु हमेशा एक दूसरे से सात राशि की दूरी पर रहते है।  इनमें 180 अंश का अन्तर होता है। राशि चक्र 360 अंश का होता है। यदि सभी ग्रह 180 अंश के क्षेत्र, अर्थात् राहु एवं केतु की धुरी के एक तरफ हों, तो दूसरा 180 अंश का क्षेत्र खाली होगा। कुंडली में इस ग्रह स्थिति को ही कालसर्पयोग कहते है।

कालसर्प योग का नाम सुनते ही मन में एक अजीब सा भय व्याप्त हो जाता है। मन में तरह तरह के विचार आने लगते है। फिर जीवन की सभी परेशानियों का कारण वह कालसर्प योग ही प्रतीत होने लगता है। परंतु ऐसा नहीं होता। जीवन में परेशानियां भी बहुत है और उनके कुंडली में दोष भी बहुत होते है। कोई एक ही दोष सभी समस्याओं का कारण नहीं होता है।  

यदि कुंडली में कालसर्प योग विद्यमान हो, तो इसे पूर्व जन्म के किसी पाप का अनिवार्य अशुभ फल मानना चाहिये। क्योंकि किए हुये कर्म का फल अवश्य भुगतना होता है। चाहे शुभ हो या अशुभ फल हो।  यदि सन्तान न हो, तो उसका कारण भी कालसर्प योग बन जाता है। मात्र पुत्रियों का ही जन्म हो तथा पुत्र सुख से वंचित हों, या पुत्र जन्म के पश्चात् उसकी हानि हो, तो उसका कारण कालसर्प योग को ही समझना चाहिए। परन्तु, ऐसा तभी सम्भव है जब काल सर्प योग में राहु पंचम भाव में स्थित हो तथा केतु एकादश भाव में। राहु के साथ शनि अथवा मंगल या सूर्य स्थित हो तथा पंचमेश क्रूर ग्रहों के प्रभाव में हो। यह कालसर्प योग तभी प्रभावी होगा, जब शेष ७ ग्रह षष्ठ भाव से लेकर दशम भाव तक या पंचम भाव से लेकर एकादश भाव तक स्थित होंगे।


इस प्रकार की ग्रह स्थिति होने पर यह कालसर्प योग संतान के विषय में चिंतित रखता है। संतान होने में परेशानी आती है अथवा संतान होती ही नहीं है। यदि इस प्रकार की ग्रह स्थिति में कुछ कमी हो, एक या दो ग्रह राहु केतु से बाहर निकल रहें हो तो इस योग का प्रभाव कुछ कम हो जाता है। परंतु प्रभाव रहता अवश्य है। यदि संतान संबंधी परेशानी हो तो अपनी जन्मपत्रिका में कालसर्प योग का विचार किसी अच्छे ज्योतिषी से अवश्य करवा लेना चाहिये और समय रहते उसका उपाय भी कर लेना चाहिये। जिससे संतान उत्पत्ति में किसी तरह की बाधा न आये। 
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Tuesday, 21 September 2021

kalsarp yog se kaisi pareshani aati hai ?/ कालसर्प योग से कैसी परेशानी आती है ? जानिए इस लेख में

Posted by Dr.Nishant Pareek

kalsarp yog se kaisi pareshani aati hai ?



कालसर्प योग से कैसी परेशानी आती है ? जानिए इस लेख में 

कालसर्प योग जीवन में अनेक प्रकार की बाधा और दुर्भाग्य उत्पन्न करता है। यह मानना अनुचित नहीं है। यदि किसी भी व्यक्ति की कुंडली में कालसर्प योग बन रहा हो रही हो तथा अन्य ग्रह योगों के कारण कालसर्प योग प्रभावहीन न हो रहा हो, तो व्यक्ति को अनेक प्रकार के अवरोध, विसंगतियों और दुर्भाग्य से जीवनपर्यन्त संघर्ष करना पड़ता है। उसके जीवन में पग पग पर बाधा आती रहती है। किस प्रकार की बाधा व अवरोध उस व्यक्ति के जीवन को बाधित करेगी, यह तथ्य ग्रहों की जन्मांग में संस्थिति पर निर्भर करता है।

सूक्ष्मता से देखें तो संतानहीनता, पारिवारिक विसंगतियाँ, कलहपूर्ण दाम्पत्य जीवन, आर्थिक विषमता अथवा विपन्नता, धन हानि, स्वास्थ्य, निरन्तर अथवा असाध्य व्याधि से पीड़ा, व्यवसाय तथा व्यापार में अवनति, हानि अथवा प्रगति का अवरुद्ध हो जाना भी कालसर्प योग का प्रतिफल है। कुटुंब में सम्पत्ति सम्बन्धी कलह, विवाह में विलम्ब अथवा विवाह में अवरोध, सन्ततिहीनता, धनहीनता तथा व्यवसायहीनता आदि से सम्बन्धित दुर्भाग्य कालसर्प योग के परिणाम के अन्तर्गत आता है। इस विषय में एक महत्त्वपूर्ण परामर्श यह है कि कालसर्प योग की शान्ति के अतिरिक्त जन्मांग में विद्यमान धनहीनता, सन्तानहीनता अथवा अन्य प्रकार की बाधाओं के शमन हेतु समुचित तथा अनुकूल मंत्र चयन करने के पश्चात् सम्बन्धित अनुष्ठान किसी योग्य, अनुभवी और विद्वान् आचार्य द्वारा सम्पन्न कराना चाहिए अथवा संपुटित मंत्रों का जप स्वयं विधिविधान सहित करना चाहिए। इसी कारण इस कालसर्प योग सीरीज के अन्त में कालसर्प योग शमन विधान के पश्चात् मैं विभिन्न विसंगतियों, अवरोधों, विषमताओं, वैवाहिक विलम्ब, धनहीनता आदि की अशुभता को निर्मूल करने हेतु अनेक मंत्र तथा सम्बन्धित प्रयोग आदि का उल्लेख अवश्य करूंगा। इसलिये आप निरंतर जुडे रहिये। 

यह भी देखने में आता है कि शनिकृत पीड़ा अथवा व्याधि अथवा अथवा मंगली दोष के कारण उत्पन्न होने वाली विघटनकारी स्थितियाँ, जैसे- वैधव्य कारक व्याधियों का भी कारण कालसर्प योग को ही मान लिया जाता है। यह उचित जन्मांग के भलीभाँति अध्ययन करने के पश्चात् यह सुनिश्चित करना चाहिए कि समस्या का कारण क्या है तथा उसका समाधान कैसे होगा। यदि शनिकृत वेदना जीवन में बाधा कर रही है तथा उसकी प्रगति, प्रतिष्ठा और प्रफुल्लता, अवरुद्ध हो गयी है तो कालसर्प योग की शान्ति के पश्चात् भी व्यक्ति की परेशानी में न्यूनता नहीं आयेगी। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए जीवन में उत्पन्न होने वाले अवरोधों के शमन और निवृत्ति हेतु सम्बन्धित विषयों तथा उनके समाधान का उल्लेख भी इसी क्रम में आने वाले लेखों में किया जायेगा।

कालसर्प योग के कारण उत्पन्न होने वाली विसंगतियाँ तथा दुर्भाग्य की परिकल्पना परिसीमित है तथा उसकी अवधि और परिधि का सम्यक् ज्ञान नितान्त अनिवार्य है जिसका शास्त्रसंगत उल्लेख अगले लेख कालसर्प योग और संतानहीनता, में किया जायेगा। 


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